Tuesday, June 23, 2009

परि और सोफ्टवेयर इंजीनियर

एक जूनियर सोफ्टवेयर इंजीनियर, एक सीनियर सोफ्टवेयर इंजिनियर और उनका टीम लीडर कार से गुडगांव में स्थित अपने दफ्तर जा रहे थे। नाइट शिफ्ट था, इसलिए काफी रात हो चुकी थी। बीच रास्ते उनकी कार बिगड़ जाती है। दूर-दूर तक कोई नहीं है। वे कार से उतर पड़ते हैं और सोचते हैं कि अब क्या करें।

तभी वहां एक परि आती है, और कहती है, “वैसे मैं केवल एक वर ही देती हूं, पर चूंकि तुम लोग तीन हो, मैं तीन वर दूंगी,” और जूनियर इंजिनयर की ओर देखते हुए बोलती है, “तुम उम्र में सबसे छोटे लगते हो, तुमसे शुरू करते हैं, बताओ, क्या वर मांगते हो।"

जूनियर इंजीनियर बहुत दिनों से अमरीका में जाकर बसने की सोच रहा था, पर वीजा नहीं मिल रहा था। उसने कहा, "मुझे कैलिफोर्निया के किसी आईटी कंपनी में पहुंचा दो।"

उसका यह कहना था कि वह तुरंत वहां से गायब हो गया और कैलिफोर्निया पहुंच गया।

बाकी दोनों यह देखकर काफी विस्मित हुए। परी ने अब सीनियर इंजीनियर की ओर देखते हुए कहा, “अब तुम्हारी बारी।”

उसे जर्मनी में नौकरी करने की इच्छा थी, सो उसने कहा, “मैं जर्मनी की किसी आईटी कंपनी में पहुंचना चाहता हूं।”

वह भी गायब हो गया और जर्मनी पहुंच गया।

अब रह गया टीम लीडर, जब परि ने उससे पूछा, "तुम क्या मांगना चाहोगे?"

उसने कहा, “मेरे इन दोनों साथियों को आधे घंटे में ही मेरे आफिस में हाजिर कर दो। हमें एक जरूरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट आज ही सब्मिट करना है। ये इस तरह काम छोड़कर अमरीका, जर्मनी नहीं जा सकते।”

क्या है इस कहानी का मोरल? यही कि सीनियर लोगों को पहले मौका देना चाहिए!

11 Comments:

Unknown said...

ab toh var dene wali pari bhi bechaari kya kare ?

संजय बेंगाणी said...

ठीक है जी पहले सिनियर टिप्पणी कर दे फिर हम करेंगे. कौन पंगा ले? :)

विवेक रस्तोगी said...

जी हां मोरल यही है कि पहले अपने बोस को ही बोलने दें तो शायद कोई आफ़त अपने ऊपर आने से बच सकती है और कुछ फ़ायदा भी हो सकता है।

संगीता पुरी said...

सीनियरों को सिर्फ अपने काम की चिंता रहती है !!

रंजना said...

Ha ha ha ha .....Sahi kaha...

Udan Tashtari said...

हा हा!!मस्त!

उन्मुक्त said...

:-)

Gyan Dutt Pandey said...

कहानी की सीख यह है कि इस तरह के वरदानों से कुछ खास होने नहीं जा रहा! :)

राज भाटिय़ा said...

भाई ऎसी परियो के पते हमे बताओ ? फ़िर सब मिल कर सब से पहले अपने निकम्मे नेताओ का इलाज करवाते है, बाकी फ़िर किसी को विदेश जाने की जरुरत ही नही पडेगी...
धन्यवाद

P.N. Subramanian said...

ये बात बनी है मस्त मस्त.

Raj said...

Very Intresting ....

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