आप सोच रहे होंगे, यह भी कैसा सवाल है। कौन नहीं जानता कि महाभारत को व्यास ऋषि ने लिखा है। पर आपका यह उत्तर गलत है। विश्वास नहीं होता? तो पढ़िए आगे।
जब भगवान व्यास ने महाभारत की कहानी मन में रच ली थी तो उनके सामने एक गंभीर समस्या आ खड़ी हुई। व्यास जी महाभारत को काव्य रूप देना चाहते थे और चूंकि महाभारत बहुत लंबा और जटिल था, यह बहुत जरूरी था कि कोई विद्वान उसे जैसे-जैसे वे बोलते जाते, लिखता जाए। विद्वान भी ऐसा हो कि लिखते वक्त कोई गलती न करे।
यह सचमुच एक विकट समस्या थी जिसे सुलझाने में व्यास जी असमर्थ थे। इसलिए उन्होंने ब्रह्माजी का ध्यान किया। जब ब्रह्मा प्रत्यक्ष हुए तो व्यास ने अपनी समस्या उनके सामने रखी।
ब्रह्मा यह जानकर बहुत प्रसन्न हुए कि व्यास ने इतने महान काव्य की रचना कर ली है। उन्होंने आशीर्वाद देते हुए कहा, गणेश की सहायता लें।
व्यास जी गणेश के पास पहुंचे। उनकी परेशानी सुनकर गणेश महाभारत को लिखने को राजी तो हुए, किंतु उन्होंने एक शर्त रखी, कलम एक बार उठा लेने के बाद काव्य समाप्त होने तक मुझे बीच में न रुकना पड़े।
व्यास जी समझ गए कि यदि वे इस शर्त को मान लेते हैं, तो आगे चलकर कठिनाइयां उत्पन्न होंगी। इसलिए उन्होंने भी एक शर्त रखी। वह यह कि लिखने से पहले गणेश को हर श्लोक का अर्थ समझना होगा।
बीच-बीच में व्यासजी कुछ कठिन श्लोक रच देते और जब गणेश उनके अर्थ पर विचार कर रहे होते, तो कुछ और श्लोक वे रच देते और इस तरह महाभारत लिखा गया, रचयिता व्यास द्वारा नहीं, बल्कि गणेश जी द्वारा।
Monday, August 03, 2009
महाभारत किसने लिखा?
लेखक: बालसुब्रमण्यम लक्ष्मीनारायण 16 टिप्पणियाँ
लेबल: महाभारत
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