जयहिंदी के एक पिछले पोस्ट में मैंने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ओफ इंडिया द्वारा की गई छापे की एक महा भूल की जानकारी दी थी। इस अखबार ने सोमवार, जून 15, के संपादकीय पृष्ठ को हुबहू मंगलवार, जून 16, के अखबार में दुबारा छाप दिया था।
इसके ठीक अगले दिन, यानी आज बुधवार, जून 17 को, टाइम्स ओफ इंडिया ने इस भूल को स्वीकारा और आज के संस्करण में बहुत ही छोटे टाइपों में दो पंक्तियों वाली यह भूल-सूचना छापी -
Wednesday, June 17, 2009
अंग्रेजी अखबार ने स्वीकारा, भूल हुई
लेखक: बालसुब्रमण्यम लक्ष्मीनारायण 8 टिप्पणियाँ
Tuesday, June 16, 2009
अंग्रेजी अखबार ने की छापे की महा भूल
टाइम्स ओफ इंडिया दुनिया का सबसे बड़ा अंग्रेजी अखबार होने का दम भरता है।
उससे आज दुनिया की सबसे बड़ी छापे की भूल भी हो गई है। इतनी बड़ी भूल कि उसे अखबारी इतिहास में ऊंचा स्थान मिलेगा।
यदि आप इस अखबार को मंगाते हों, तो आज (जून 16) की प्रति के संपादकीय पृष्ठ को देखें, और साथ में इसी अखबार के कल (जून 15) के संपादकीय पृष्ठ को भी। क्या आपको दोनों पृष्ठों में कोई अंतर नजर आया?
उन लोगों की सुविधा के लिए जो इस अखबार को नहीं मंगाते, मैं दोनों पृष्ठों का चित्र नीचे दे रहा हूं। ध्यान से देखकर बताइए कि दोनों पृष्ठों में कोई अंतर है?
क्या, तारीख के सिवा आपको कोई अंतर नहीं नजर आया? अरे यही तो है महा भूल जो इस अखबार से हो गई है!
इस अखबार ने जून 15 और जून 16 को अपने अखबार में हूबहू एक ही संपादकीय पृष्ठ छाप डाला है! वे ही संपादकीय लेख, वही मुख्य लेख, वे ही पाठकों के पत्र। हर दृष्टि में दोनों पृष्ठ एक-जैसे हैं। केवल तारीख अलग है।
इतनी बड़ी भूल तो एक पृष्ठ वाला नुक्कड़ का अखबार भी नहीं करता। और यह भूल हुई है दुनिया का सबसे बड़ा अंग्रेजी अखबार कहलानेवाले टाइम्स ओफ इंडिया से, जिसके पास अपार साधन हैं, दर्जनों प्रूफ-शोधक, उपसंपादक, संपादक, प्रबंध संपादक, कंप्यूटर, और न जाने क्या-क्या अत्याधुनिक तामझाम।
यह अखबार हिंदी, हिंदी साहित्य, हिंदी साहित्यकार, हिंदी अखबार आदि पर खूब खिल्ली उड़ाता है। आज हमें मौका मिला है इसे ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए, तो खूब हंसिए इस अखबार की इस महा भूल पर, जिसने इसके लिए मुंह छिपाने के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी है।
आखिर अखबार का सबसे महत्वपूर्ण पृष्ठ संपादकीय पृष्ठ होता है, जिस पर प्रधान संपादक से लेकर, अखबार मालिक तक सबकी नजर जाती है। उसे सजाने-संवारने में सबसे अधिक ध्यान दिया जाता है। और इसी पृष्ठ पर इतनी बड़ी भूल हो गई है। सारा पृष्ठ ही गलत छप गया है! होगी अखबारी इतिहास में इससे बड़ी गफलत की मिसाल!
अब देखना यह है कि यह अखबार कल के संस्करण में क्या सफाई पेश करता है, इस महा भूल के बारे में।
यदि आप कुछ पैसे कमाना चाहते हों, तो इस अखबार के कल और आज के संस्करण खरीदकर संजोकर रखें। ये प्रतियां बेशकीमती हैं। कौन जाने, कल को कोई सनखी कलेक्टर इस गलत छपे संपादकीय पृष्ठ वाली प्रति को आपसे हजारों रुपए देकर खरीद ले जाए!
लेखक: बालसुब्रमण्यम लक्ष्मीनारायण 21 टिप्पणियाँ
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