Sunday, August 02, 2009

हिंदी का पहला समांतर कोष

हिंदी का पहला समांतर कोष (थिसोरस) अरविंद कुमार और उनकी धर्म पत्नी कुसुम कुमार ने तैयार किया है। अरविंद कुमार माधुरी नामक फिल्म पत्रिका के संपादक रह चुके हैं। इस कोष को पूरा करने में उन्हें 25 साल लगे। कोष को दिल्ली स्थित नेशनल बुक ट्रस्ट ने प्रकाशित किया है। इसमें 160,855 शब्दों के समांतर शब्द दिए गए हैं।

शब्द कोष और समांतर कोष का अंतर समझाते हुए अरविंद कुमार कहते हैं कि जहां शब्द कोष शब्दों को परिभाषा देते हैं, समांतर कोष भाषा को शब्द देता है। श्री कुमार ने समांतर कोष पर 1952 में काम शुरू किया था, जिससे ठीक एक सदी पहले, यानी 1852 को, अंगरेजी भाषा का पहला समांतर कोष रोजर ने प्रकाशित करवाया। श्री कुमार बताते हैं कि संस्कृत भाषा में सबसे पहले समांतर कोष बने।

कोष पर काम करने के अनुभवों को सुनाते हुए श्री कुमार कहते हैं कि उनका पहला प्रशंसक एक बिल्ली थी जो उनके कमरे में एक कोने पर लेटी-लेटी उनके काम को देखती रहती थी। कभी-कभी वह उनकी गोदी पर भी आकर बैठ जाती थी। जिस काम को पूरा करने में पूरे ढाई दशक लगे उसके बारे में श्री अरविंद का सोचना था कि वह बस दो-ढाई सालों की बात है। सौभाग्य से 1980 के दशक में कानपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के एक छात्र श्री मोहन तांबे ने जिस्ट कार्ड का आविष्कार किया जिससे कंप्यूटर पर हिंदी के तथ्य कोष संकलित करना संभव हुआ। इससे कोष का काम काफी सरल हुआ।

भविष्य के लिए उनकी अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं, जैसे हिंदी-अंगरेजी का समांतर कोष और समस्त भारतीय भाषाओं का एक साझा समांतर कोष का निर्माण। श्री कुमार बच्चों के लिए कहानियां भी लिखना चाहते हैं।

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