
पता नहीं यह घटना सचमुच घटी थी या नहीं, पर है मजेदार!
जापान के प्रधान मंत्री योशीरो मोरी अमरीका की यात्रा पर जानेवाले थे। वे अंग्रेजी बहुत कम जानते थे। इसलिए उनके सचिवों ने उन्हें अंग्रेजी के कुछ सरल वाक्य रटा दिए, जिनका प्रयोग उन्हें अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा से मिलने पर करना था। इन दो-एक वाक्यों के बाद दोनों ओर के दुभाषिए काम संभाल लेंगे, यही योजना थी।
तो मोरी जी को सिखाया गया कि जैसे ही आप ओबामा के सामने आएं, कह दें, “हाउ आर यू?” (आप कैसे हैं?)
ओबामा जवाब देंगे, “आई एम फाइन, एंड यू?” (मैं ठीक हूं, आप कैसे हैं?)
इसके जवाब में आप कह दें, “मी टू।“(मैं भी।)
मोरी साहब ने ये दोनों वाक्य रट लिए।
कुछ ही समय में मोरी साहब पहुंच गए अमरीका और आ गए ओबामा के सामने। पर उनसे थोड़ी सी चूक हो गई - “हाउ आर यू?” के बजाए उनके मुंह से निकल गया, “हू आर यू?” (आप कौन हैं?)
यह सुनकर ओबामा को भारी धक्का लगा, पर किसी तरह अपने आपको संभालते हुए, मजाक के लहजे में उन्होंने जवाब दिया, “आई एम माइकेलास हसबैंड, हा, हा, हा!” (मैं माइकेला का पति हूं, हा, हा, हा।)
मोरी जी को इसका अर्थ बिलकुल समझ न आया, और उन्होंने रटा हुआ दूसरा वाक्य ही बोल दिया, "मी टू!” (मैं भी।)
इससे ओबामा की बोलती ही बंद हो गई और काफी देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही!
Tuesday, June 23, 2009
कौन है माइकेला का असली पति?
लेखक: बालसुब्रमण्यम लक्ष्मीनारायण 6 टिप्पणियाँ
लेबल: चुटकुले
परि और सोफ्टवेयर इंजीनियर
एक जूनियर सोफ्टवेयर इंजीनियर, एक सीनियर सोफ्टवेयर इंजिनियर और उनका टीम लीडर कार से गुडगांव में स्थित अपने दफ्तर जा रहे थे। नाइट शिफ्ट था, इसलिए काफी रात हो चुकी थी। बीच रास्ते उनकी कार बिगड़ जाती है। दूर-दूर तक कोई नहीं है। वे कार से उतर पड़ते हैं और सोचते हैं कि अब क्या करें।
तभी वहां एक परि आती है, और कहती है, “वैसे मैं केवल एक वर ही देती हूं, पर चूंकि तुम लोग तीन हो, मैं तीन वर दूंगी,” और जूनियर इंजिनयर की ओर देखते हुए बोलती है, “तुम उम्र में सबसे छोटे लगते हो, तुमसे शुरू करते हैं, बताओ, क्या वर मांगते हो।"
जूनियर इंजीनियर बहुत दिनों से अमरीका में जाकर बसने की सोच रहा था, पर वीजा नहीं मिल रहा था। उसने कहा, "मुझे कैलिफोर्निया के किसी आईटी कंपनी में पहुंचा दो।"
उसका यह कहना था कि वह तुरंत वहां से गायब हो गया और कैलिफोर्निया पहुंच गया।
बाकी दोनों यह देखकर काफी विस्मित हुए। परी ने अब सीनियर इंजीनियर की ओर देखते हुए कहा, “अब तुम्हारी बारी।”
उसे जर्मनी में नौकरी करने की इच्छा थी, सो उसने कहा, “मैं जर्मनी की किसी आईटी कंपनी में पहुंचना चाहता हूं।”
वह भी गायब हो गया और जर्मनी पहुंच गया।
अब रह गया टीम लीडर, जब परि ने उससे पूछा, "तुम क्या मांगना चाहोगे?"
उसने कहा, “मेरे इन दोनों साथियों को आधे घंटे में ही मेरे आफिस में हाजिर कर दो। हमें एक जरूरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट आज ही सब्मिट करना है। ये इस तरह काम छोड़कर अमरीका, जर्मनी नहीं जा सकते।”
क्या है इस कहानी का मोरल? यही कि सीनियर लोगों को पहले मौका देना चाहिए!
लेखक: बालसुब्रमण्यम लक्ष्मीनारायण 12 टिप्पणियाँ
लेबल: चुटकुले
Sunday, June 21, 2009
अजित-राबर्ट-मोना जोक्स
अज रविवार है, छुट्टी का दिन। चलिए थोड़ा हंस लेते हैं। यहां इंटरनेट पर जितने भी अजित-राबर्ट-मोना जोक्स मिले, सब दे दिया है। यदि आप इनके अलावा भी इस वर्ग के और चुटकुले जानते हों, तो टिप्पणियों में बताएं।
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राबर्ट – बॉस इस आदमी ने हमसे गद्दारी की है।
अजित – इस कुत्ते के एक हाथ में टाइटन की घड़ी और दूसरे हाथ में एचएमटी की घड़ी पहना दो।
रोबर्ट – लेकिन बॉस यह तो गद्दार है।
अजित – हम जानते हैं राबर्ट, इसे बताना है कि यह दो घड़ी का महमान है।
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राबर्ट – बॉस सोना कहा है (गोल्ड कहां है के अर्थ में)?
अजित – सारी हवेली हमारी है, कहीं भी सो जाओ राबर्ट।
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राबर्ट और अजित एक नाव में पुलिस से बचकर भाग रहे हैं। अचानक नाव में छेद हो जाती है।
राबर्ट – अब क्या होगा बॉस?
अजित – एक और छेद कर दो राबर्ट।
राबर्ट – एक और छेद?
अजित – एक छेद से पानी अंदर आएगा, दूसरे से बाहर चला जाएगा।
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अजित – इस गद्दार को शैंपेन में डुबो दो।
रोबर्ट – वह क्यों बॉस?
अजित – यदि शेम से नहीं मरा तो पेइन से मर जाएगा।
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मोना – बॉस मैं टोनी से शादी कर रही हूं।
अजित – मोना ऐसा बिलकुल मत करना।
मोना – क्यों बॉस?
अजित – उससे यहां मोनाटोनी हो जाएगी।
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लेकिन मोना नहीं मानती और वह टोनी से शादी कर लेती है। कुछ समय बाद वह जुड़वे लड़कों को जन्म देती है।
राबर्ट – बॉस मोना ने जुड़वे बच्चों को जन्म दिया है।
अजित – ठीक है, हमने उनके लिए नाम भी सोच लिए हैं, एक का पीटर और दूसरे का रिपीटर।
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कुछ और समय बीतने पर मोना फिर जुड़वे बच्चों को जन्म देती है, इस बार दोनों लड़कियां।
राबर्ट – बॉस इस बार मोना के जुड़वी लड़कियां हुई हैं।
अजित – ठीक है, पहली वाली का नाम केट रख दो और दूसरी का डूप्लिकेट।
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राबर्ट – बॉस आज मैं काम पर नहीं आ सकूंगा, स्टमक एक है।
अजित – अबे बेवकूफ, सभी के पास एक ही स्टमक होता है।
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अजित – इस गद्दार को दुनिया से आजाद कर दो और उसकी लाश के साइड में सुई घोंपकर पुलिस स्टेशन के सामने फेंक दो।
राबर्ट – लेकिन बॉस लाश के साइड में सुई क्यों घोंपे?
अजित – ताकि पुलिस समझे कि यह सुईसाइड का मामला है।
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राबर्ट – बॉस मेरी बीबी ने तीन बच्चे जन्मे हैं। उनके नाम क्या रखूं।
अजित – पहले का पीटर, दूसरे का रिपीटर और तीसरे का चिन चिन मिन।
राबर्ट – बॉस तीसरे का नाम चिन चिन मिन क्यों?
अजित – अरे बेवकूफ, दुनिया में पैदा होनेवाला हर तीसरा बच्चा चीनी होता है।
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मिकी माउस – बॉस मुझे रामायण पढ़नी है।
अजित – राबर्ट, इसे वाल पर चिपका दो।
राबर्ट – वह क्यों बॉस?
अजित – तब यह वालमिकी हो जाएगा और इसे रामायण अपने आप आ जाएगी।
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अजित को विदेश यात्रा में जानी थी, पर प्लेन का टिकट नहीं मिला।
अजित – राबर्ट इस बस में हवा भर दो।
राबर्ट – वह किस लिए बॉस?
अजित - तब यह एयरबस बन जाएगी और हम उसमें विदेश चले जाएंगे।
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राबर्ट – बॉस चीन से हू आए हैं।
अजित – उसे गोली मार दो।
राबर्ट - पर क्यों बॉस?
अजित – हू मरकर ह्यूमर बन जाएगा और सबको हंसाएगा।
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मोना से टाइपिंग में बहुत सारी गलतियां हो जाती हैं और अजित उस पर बहुत नाराज हो उठते हैं।
अजित – राबर्ट मोना के दोनों हाथ काट दो।
राबर्ट – मगर क्यों बॉस?
अजित – टाइपिंग नहीं कर पाती, शोटहैंड तो आ जाएगी उसे।
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राबर्ट गैंग के गद्दारों को पकड़कर अजित के सामने पेश करता है।
अजित – इन कुत्तों में कंप्यूटर फिट करके डीबगर चालू कर दो।
राबर्ट – उससे क्या होगा बॉस?
अजित – साले जाकर चेकपोइंट में अटक जाएंगे।
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अजित के सामने गद्दार लाया गया है।
अजित – इसे इरेसर से मार दो।
राबर्ट – उससे क्या होगा बॉस?
अजित – यह मर भी जाएगा मिट भी जाएगा।
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राबर्ट – बॉस आपको कौन सी तीन चीजें सबसे ज्यादा पसंद हैं?
अजित – एक मोना, दूसरी सोना, और तीसरी मोना के साथ सोना।
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राबर्ट गद्दार को अजित के सामने पेश कर रहा है।
राबर्ट – इसका क्या करें बॉस?
अजित – इसे लिक्विड आक्सीजन में डाल दो।
राबर्ट – उससे क्या होगा बॉस?
अजित – लिक्विड उसे जीने नहीं देगा और आक्सीजन उसे मरने नहीं देगा।
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अजित राबर्ट को गद्दार को मारने का आदेश दे रहे हैं।
राबर्ट – इसे वार्निश में डाल दो, मर भी जाएगा फिनिश भी हो जाएगा।
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राबर्ट – बॉस मैं मिशन पर नहीं जा सकता। हेड एक है।
अजित – अबे बेवकूफ, हेड सबके एक ही होता है।
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राबर्ट गद्दार को अजित के सामने पेश करता है।
अजित – इसके एक हाथ में लाल रंग और दूसरे में हरा रंग लगा दो और पुलिस स्टेशन के सामने फेंक आओ।
राबर्ट – लेकिन क्यों बॉस।
अजित – अरे बेवकूफ, इससे पुलिस उसे रंगे हाथों पकड़ लेगी।
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अजित – डायना को कुछ खट्टा पिला दो।
राबर्ट – उससे क्या होगा बॉस?
अजित – इससे वह डायना से डायनासोर बन जाएगी, फिर एक्स्टिंक्ट हो जाएगी।
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राबर्ट – बॉस यह आदमी कुछ बोलता ही नहीं है।
अजित – उसे रिवोल्विंग चेयर पर बिठा दो, पता तो लगे चक्कर क्या है।
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राबर्ट और अजित शिकार करने जंगल में निकल हैं। राबर्ट को मोर दिखाई देता है।
राबर्ट – बॉस, मोर, मोर।
अजित, मोर को गोली मारकर - नोमोर।
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अजित – मोना तुमा लीसा के साथ मत जाओ राबर्ट के साथ जाओ।
मोना – क्यों बॉस?
अजित – नहीं तो तुम मोनालीसा बन जाओगी।
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अजित – राबर्ट बता सकते हो मर्द और माउस में क्या फर्क होता है?
राबर्ट – नहीं बॉस।
अजित – स्टुपिड। कुछ मर्दों के माउसीजी होती है, पर माउस के मर्दजी नहीं हो सकते।
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राबर्ट – अमरीका में वार हो गया है बॉस।
अजित- उल्लू, उसमें क्या बड़ी बात है, यहां तो हर रोज वार होता है।
राबर्ट – वह कैसे बॉस?
अजित – सिली बॉय! सोमवार, मंगलवार, बुधवार...
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राबर्ट – बॉस मुझे एक मिनिस्टर बनना है।
अजित – तुम एक फाइल में बैठ जाओ, अपने आप कैबिनेट में चले जाओगे।
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अजित अपने आदमियों को मिशन पर भेज रहे हैं।
अजित – पीटर, तुम मोटर में जाओ।
मैनकशा, तुम रिक्शा में जाओ।
माइकेल, तुम साइकेल से जाओ।
और मोना डार्लिंग, तुम मेरे साथ आओ।
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अजित – अच्छा हुआ जोर्ज बुश ने मैनुएल नोरिएगा को पकड़ लिया।
राबर्ट – वह क्यों बॉस?
अजित – नोरिएगा (न रहेगा) बांस न बजेगी बांसुरी।
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राबर्ट – बॉस मोना को आस्ट्रेलिया देखना है।
अजित – उसे पत्थर के साथ बांधकर समुद्र में फेंक दो।
राबर्ट – मगर क्यों बॉस?
अजित – बेवकूफ! ताकि वह डाउन अंडर चली जाए।
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अजति – पीटर को बेबीसिटर भेज दो, टोनी को पोनी पर बिठा दो, मैक को पैक कर दो और मोना डार्लिंग तुम मुझे नाच दिखाओ।
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अजित – इसे ग्रेट वाल ओफ चाइना ले जाकर फांसी पर चढ़ा दो।
राबर्ट – उससे क्या होगा बॉस?
अजित – बेवकूपफ, यह ग्रेट वाल हैंगिग बन जाएगा।
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लेखक: बालसुब्रमण्यम लक्ष्मीनारायण 4 टिप्पणियाँ
लेबल: चुटकुले
Saturday, June 20, 2009
आस्ट्रेलिया जोक
मेलबोर्न हवाई अड्डे से विमान बस उड़ने ही वाला था। लगभग सभी यात्री बैठ चुके थे। आस्ट्रेलिया में हो रही नस्लवादी हिंसा से घबराकर बहुत से भारतीय मेलबोर्न छोड़कर भाग रहे थे। इसलिए विमान खचा-खचा भरा हुआ था।
तभी एक श्वेत आस्ट्रेलियाई महिला विमान में चढ़ी और अपनी जगह ढूंढ़ने लगी। उसका टिकट एकोनोमी क्लास वाला था। परिचारिका ने उसे उसकी जगह दिखा दी।
श्वेत महिला अपनी सीट की ओर बढ़ी पर एकएक ठिठक गई और जोर-जोर से परिचारिका को बुलाने लगी। परिचारिका दौड़ी-दौड़ी आई और पूछा क्या बात है।
श्वेत महिला – मेरी सीट तुरंत बदल दीजिए, मैं यहां नहीं बैठ सकती।
परिचारिका – लेकिन मैडम आपकी सीट में क्या समस्या है?
श्वेत महिला (उसकी सीट के बगल में बैठे भारतीय व्यक्ति की ओर इशारा करते हुए) - मैं 20 घंटे इस हब्शी के बगल में नहीं बैठी रह सकती।
परिचारिका – मैडक ऐसे कारणों के लिए हम सीट नहीं बदलकर दे सकते।
पर वह महिला भी अड़ गई, खूब हंगामा करने लगी। तब हारकर परिचारिका ने कहा – ठीक है मैडम, मैं देखकर आती हूं, कहीं दूसरी सीट खाली है कि नहीं।
परिचारिका के जाने पर महिला प्लेन के गलियारे में ही खड़ी-खड़ी उस भारतीय यात्री पर नजरों ही नजरों शोले बरसाने लगी।
थोड़ी देर में परिचारिका लौट आई और बोली – हमें खेद है मैडम, कोई भी दूसरी सीट एकनोमी क्लास में खाली नहीं है, आपको अपनी ही सीट पर बैठना पड़ेगा।
वह नस्लवादी महिला भी इतनी आसानी से हार मानने वाली नहीं थी। बोली - तुम कुछ भी करो, मेरी सीट बदल दो, वरना मैं सारी यात्रा खड़ी-खड़ी ही चली चलूंगी। जाओ विमान के कप्तान को बुला लाओ।
बेबस परिचारिका को ऐसा ही करना पड़ा। कप्तान महोदय आए। उसे सब कुछ बताया गया।
उसने कहा - मैडम, हम सामान्यतः एकनोमी क्लास वालों को बिजनेस क्लास में नहीं बैठाते, पर चूंकि एकोनोमी क्लाम में कोई सीट खाली नहीं है, इसलिए बिजनेस क्लास में देखता हूं कि कुछ व्यवस्था हो सकती है।
और उसने परिचारिका को पता लगाकर आने को कहा कि क्या बिजनेस क्लास में कोई सीट खाली है।
थोड़ी देर में परिचारिका लौट आई और बोली – जी हां, वहां एक सीट खाली है।
यह सुनना था कि उस श्वेत महिला के मुंह पर विजयी मुस्कान फैल गई। उस भारतीय व्यक्ति पर हिकारत की दृष्टि डालते हुए, वह अपना सामान समेटने लगी।
तभी कप्तान ने भारतीय व्यक्ति से कहा – महोदय, आप अपना सामान ले लें, मैं आपको बिजनेस क्लास में आपकी नई सीट दिखा देता हूं।
विमान के सभी यात्री गदगद हो उठे और उन्होंने कप्तान की न्याय प्रियता का तालियों से स्वागत किया।
नस्लवादी महिला यही सोचने लगी, जमीन फट जाए और मैं उसमें समा जाऊं।
---
ऐसी घटना वास्तविक जीवन में अभी बहुत सालों तक नहीं होने वाली है। फिर भी कल्पना लोक में ही सही किसी भारतीय के साथ विदेशों में न्याय होता देखकर मन को शकून मिलता है। क्या कहेंगे आप?
लेखक: बालसुब्रमण्यम लक्ष्मीनारायण 4 टिप्पणियाँ
लेबल: आस्ट्रेलिया, चुटकुले, नस्लवाद
Thursday, April 30, 2009
सच्चा होगा तेरा बाप!
यह रही सत्यम चुटकुलों की नई खेप। आशा है आपको पसंद आएंगे।
***
राजू, राजू।
येस पप्पा।
चीटिंग शेयरहोल्डर्स?
नो पप्पा।
टेलिंग लाइस?
नो पप्पा।
ओपन योर बैलेन्सशीट।
हा, हा हा!
***
2+2 कितने होते हैं?
इंजीनियर: 4
जज: उसे 4 होना चाहिए।
नेता: मैं उसे 4 बना दूंगा।
राजू: आप बताइए उसे क्या होना चाहिए।
***
मास्टरजी - राजू, तुम्हारे दांत मोतियों के जैसे चमक रहे हैं।
राजू - क्यों न चमकेंगे, मास्टरजी, अपनी ही कंपनी का पैसा जो मैंने खाया है।
***
बच्चा मां से – मम्मी, इस शब्दकोश में एक गलती है।
मां – हो ही नहीं सकती बेटे, यह 100 साल पुरानी किताब है, कितने ही संस्करण हो चुके हैं इसके।
बच्चा – नहीं मम्मी, सचमुच इसमें एक गलती है।
मां – क्या कहते हो?
बच्चा – हां मम्मी, इसमें दिया हुआ है कि सत्यम का मतलब सचाई होता है।
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सत्यम कांड के बाद बावर्ची महासंघ ने राजू को ऊंचे वेतन वाली नौकरी की पेशकश की।
सत्यम खातों को जिस खूबी से राजू ने पकाया था, उसे देखकर बावर्ची महासंघ को यकीन हो गया था कि राजू सचमुच एक बेहतरीन बावर्ची हैं।
***
सांता बांता से – यार अब तो सरकार भी खुलेआम भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने लगी है।
बांता (जंभाई दबाते हुए) – कोई नई बात बता न यार।
सांता – नहीं यार, यह तो हद हो गई।
बांता – क्या हद हो गई?
सांता (एक रुपए का सिक्का दिखाते हुए) - यह जो यहां लिखा हुआ है।
बांता – क्या लिखा हुआ है इसमें?
सांता (रुपया बांता को देते हुए) – लो खुद ही पढ़ लो।
बांता (रुपया न लेते हुए) - तू ही पढ़कर बता न।
सांता – यहां लिखा हुआ है, सत्यमेव जयते।
***
सत्यम के बाद सलमान रशदी, अभिमन्यू चैटर्जी, शोभा डे, और अरुणधती राय इतने खफा क्यों हैं?
क्योंकि सत्यम की लेखा पोथियां अंग्रेजी गल्प साहित्य के वर्ग में उनकी किताबों को कहीं पीछे छोड़ गई हैं।
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पापा बेटे के गणित होमवर्क का निरीक्षण कर रहे थे।
पापा – बेटे, यहां तुझसे एक गलती हो गई है।
बेटा – कहां पापा?
पापा – यहां। तूने 1+1=11 लिख दिया है। उसे 2 होना चाहिए।
बेटा – नहीं पापा। वह गलती नहीं है। सत्यम के बाद गणित के नियम बदल गए हैं। अब 1+1 11 ही होते हैं।
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क्या आपने सत्यम के बाद कौओं के व्यवहार में आए परिवर्तन की ओर ध्यान दिया?
वे अब सच बोलनेवालों को काट रहे हैं!
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राज कपूर फिल्म्स के शानदार कक्ष में रहमान और ऋषि कपूर बैठे हुए थे। बात यह थी कि राज कपूर फिल्म्स बोबी फिल्म का रीमेक बनवा रहा था।
ऋषि कपूर - रहमान जी, जय हो के लिए बधाई।
रहमान – शुक्रिया... मुझे यहां क्यों बुलाया है आपने।
ऋषि - हम चाहते हैं कि बोबी के गानों का रीमेक आप ही करें। उसके एक गाने में हम थोड़ा परिवर्तन चाहते हैं।
रहमान - किस गाने में?
ऋषि - झूठ बोले कौआ काटे वाला गाना... , सत्यम के बाद वह अब प्रासंगिक नहीं रहा। उसे हम, सच बोले कौआ काटे..., के रूप में रीमेक करना चाहते हैं।
***
बबलू और उसके दोस्त में कुछ कहा-सुनी हो गई। बबलू रोता हुआ मां के पास आया।
बबलू - मम्मी, इसने मुझे सच्चा कहा।
मां (बबलू की दोस्त को डांटते हुए) - बदमाश, तेरी यह मजाल! सच्चा होगा तेरा बाप!
***
लेखक: बालसुब्रमण्यम लक्ष्मीनारायण 4 टिप्पणियाँ
लेबल: चुटकुले