Saturday, June 27, 2009

आयोडीन की कमी से एक-चौथाई मानवजाति पीड़ित


विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 1.6 अरब व्यक्ति आयोडीन की कमी से उत्पन्न विभिन्न बीमारियों से पीड़ित हैं। इनमें से एक-तिहाई एशिया के निवासी हैं।

डाक्टर सलाह देते हैं कि स्वस्थ रहने के लिए हर दिन 150 माइक्रोग्राम आयडीन खाना चाहिए। बाल्यावस्था में आयोडीन की कमी से मस्तिष्क व अन्य महत्वपूर्ण शारीरिक अंगों का समुचित विकास नहीं हो पाता है। गर्भावस्था में आयोडीन की कमी से बौने व मंदबुद्धि बच्चे पैदा होते हैं। सर्वेक्षणों में देखा गया है कि जिन बच्चों में आयोडीन की कमी थी, उनकी बौद्धिक क्षमता सामान्य बच्चों से 10-15 प्रतिशत कम है। आयोडीन की कमी से घेंघा नामक बीमारी भी होती है, जिसमें गर्दन के आधार पर स्थित थाइरोइड ग्रंथी सूज जाती है।

यद्यपि स्वस्थ रहने के लिए आयोडीन की बहुत कम मात्रा ही आवश्यक होती है, पर बहुत से समुदायों में प्रचलित आहारों में आयोडीन नहीं रहता है। पहाड़ों व बाढ़-पीड़ित क्षेत्रों में रहनेवालों में आयोडीन की कमी सामान्यतः पाई जाती है, क्योंकि वहां की मिट्टी में आयोडीन नहीं होता। बाढ़ का पानी मिट्टी में मौजूद आयोडीन को घुलाकर या तो जमीन के नीचे ले जाता है अथवा सतही बहाव के साथ उसे अन्यत्र पहुंचा देता है। इसलिए यहां उगाई गई फसलों में और पालतू पशु-पक्षियों के मांस-दूध आदि में आयडीन नहीं होता। इस कारण इन भोजनों पर निर्भर मनुष्य भी आयडीन की कमी की चपेट में आ जाते हैं।

समृद्ध देशों में भी आयोडीन की कमी से जुड़ी समस्याएं पुनः सिर उठा रही हैं, खासकर के यूरोप में, जहां लोग दुग्ध उत्पादों व मांस से आयोडीन प्राप्त करते हैं। वहां के पशुपालक पैसा बचाने की फिराक में अपने जानवरों को बिना आयोडीन वाला नमक खिलाते हैं, जो सस्ता होता है। इससे दूध, मांस आदि में भी आयोडीन की मात्रा कम हो जाती है। अंततः मनुष्यों को इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ता है।

युनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन व अनेक सरकारों के प्रयासों से खुराक में आयोडीन शामिल करने के महत्व के बारे में अब अधिक लोग सचेत हो रहे हैं। फिर भी आयोडीन की कमी से जुड़ी समस्याओं से पूर्णतः मुक्ति पाने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है।

चूंकि शरीर को स्वस्थ रहने के लिए बहुत कम मात्रा में ही आयडीन की जरूरत होती है, नमक जैसे व्यापक रूप से उपयोग किए जानेवाले किसी खाद्य-सामग्री में आयडीन मिलाकर बेचने से जन-समुदाय को आयडीन की कमी से बहुत हद तक बचाया जा सकता है। अनेक देश यही रणनीति अपना रहे हैं। भारत में भी आडीन मिला हुआ नमक बेचने के संबंध में अनेक कानून बने हुए हैं। पर इनके साथ-साथ हमारे यहां देशी नमक की भी खूब बिक्री होती है, जिसमें आयडीन नहीं होता है। इसलिए इस प्रयास का फायदा केवल उन लोगों को होता है जो आयडीन वाला नमक खरीदते और उपयोग करते हैं। कहना न होगा कि व्यापक गरीबी के कारण देश के अधिकांश लोग, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में, महंगा आयोडीनयुक्त नमक नहीं खरीदते और देशी नमक या पत्थर नमक से ही काम चलाते हैं।

आयोडीन युक्त भोज्य-पदार्थों में शामिल हैं, दूध, दही, पनीर, मांस, अंडे, मछली, समुद्र से प्राप्त भोज्य पादर्थ, विशेषकर सीवीड, ब्रेड तथा अन्य बेकरी उत्पाद, और अनाज।

अगति (सेसबेनिया ग्रांडिफ्लोरा) नामक एक उष्णकटिबंधीय वृक्ष है जो तेजी से बढ़ता है और देश-विदेश में सजावटी वृक्ष के रूप में खूब उगाया जाता है। यह उन थोड़े से पौधों में से एक है जिसमें आयडीन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इसके खाने योग्य अंशों के हर 100 ग्राम में 2 मिलीग्राम आयडीन रहता है।

अगति (सेसबेनिया ग्रांडिफ्लोरा)

यह 12 मीटर की ऊंचाई प्राप्त करता है और इसकी दो जातियां हैं - एक में लाल फूल होते हैं और दूसरे में सफेद फूल। सफेद फूल वाली अगति को घर के पिछवाड़े के बगीचे में भी उगाया जा सकता है।

अगति काली कपासी मिट्टी में अच्छी तरह उगती है। वह सूखे को भी झेल सकती है। पहले उसके बीजों को पौधशाला में उगाया जाता है, फिर शिशु पौधों को खेतों में प्रत्यारोपित किया जाता है। तमिलनाडु में इसकी खूब खेती होती है। खेतों में रोपने के दो महीने बाद पौधों को अमोनियम सल्फेट की खाद दी जाती है। इस वृक्ष में सितंबर-दिसंबर में बहार आता है और गर्मियों में इसमें फल लगते हैं।

इसके पत्तों और फूलों में अनेक औषधीय गुण भी पाए जाते हैं।

सामान्य भोज्य सामग्रियों में विद्यमान आयडीन की सूची नीचे दी गई है (100 ग्राम में) –

नमक (आयडीन मिलाया हुआ) – 3000 माइक्रोग्राम
समुद्री भोज्य सामग्री – 66 माइक्रोग्राम
मांस – 26 माइक्रोग्राम
अंडे – 26 माइक्रोग्राम
दुग्ध उत्पाद – 13 माइक्रोग्राम
ब्रेड तथा अनाज – 10 माइक्रोग्राम
फल – 4 माइक्रोग्राम

4 Comments:

AlbelaKhatri.com said...

umda
bahut umda jaankaari !
dhnyavaad !

गिरिजेश राव said...

मैं यह बेट लगाता हूँ कि 'अमर उजाला' के ब्लॉग कोना में कतर पेंच के बाद यह लेख छपने वाला है।
उपयोगी जानकारी।

यह 'अगति' का पौधा भी कमाल का है। इसे अलग से देना था। आप से नहीं होता तो मुझे बता देते। फोटो तो लगा ही दें जिससे यहीं इसकी प्रोफाइल पूरी हो जाय।

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

आयोडीन की महिमा तो जग विख्यात है। इसके भय के चलते कुछ लोग ज्यादा आयोड़ीन भी ले लेते होंगे!
अच्छा लिखा आपने।

राजीव दीक्षित स्वदेशी संस्था अहमदाबाद said...

http://rajivdixitamd.blogspot.in/ krupya is blog ki visit jarur le taki or jankari mil sake

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