Friday, June 05, 2009

बाल की खाल


कवियों और प्रेमियों ने शारीरिक सौंदर्य का अभिवर्धन करने वाले अंगों में बालों को आंखों के बाद दूसरा स्थान दिया है। मनुष्य के बाल विभिन्न रंगों के होते हैं और विभिन्न मानव-समूहों के बालों की विशेषताएं अलग-अलग होती हैं। इतना ही नहीं, बालों का रंग-रूप उम्र के साथ भी बदलता है, हालांकि लोग खिजाब, डाई आदि के इस्तेमाल से इस परिवर्तन पर पर्दा डाले रखने की खूब कोशिश करते हैं। शरीर के विभिन्नों भागों में उगते बाल भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं।

एक स्वस्थ मनुष्य के शरीर पर कम से कम एक लाख बाल होते हैं। वे प्रति दिन 0.35 मिलीमीटर की दर से बढ़ते हैं। बढ़ने की यह दर उम्र और लिंग पर आधारित होता है। 15-30 वर्ष के मनुष्यों में बाल का बढ़ाव सबसे अधिक होता है।

बाल ठंडे मौसम की तुलना में गरम मौसम में अधिक तेजी से बढ़ते हैं। यह धारणा गलत है कि काटे जाने पर बाल अधिक तेजी से बढ़ते हैं। बालों के झड़ने से अधिकांश लोग परेशान रहते हैं, पर दिन में 50-100 बालों का झड़ना सामान्य बात है। झड़े हुए बाल नए सिरे से उग आते हैं।

बाल एक अत्यंत शक्तिशाली पदार्थ है। परीक्षणों से पता चला है कि वह 160 ग्राम के वजन के खिंचाव को बिना टूटे सह सकता है। हड्डियों के समान बाल भी आसानी से नष्ट नहीं होते। मिस्र के राजा रामासेस द्वितीय के परिरक्षित शरीर पर बाल आज भी ठीक हालत में विद्यमान हैं, यद्यपि उनके मरे 3,000 से भी अधिक साल हो गए हैं।

एक औसत मनुष्य के जीवनकाल में बाल यदि काटे न जाए तो 55-70 सेंटीमीटर तक बढ़ेंगे। यद्यपि स्त्रियों में पुरुषों से अधिक लंबे बाल होते हैं, दुनिया में सबसे लंबे बाल होने का कीर्तिमान एक पुरुष का है। सन 1949 में तमिल नाड के स्वामी पंडरसन्नधि नामक व्यक्ति के बालों की अधिकतम लंबाई 26 फुट पाई गई।

3 Comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

बाल चर्चा अच्छी और भली लगी। आखिर हमारे सर पर भी कभी केश हुआ करते थे।

ताऊ रामपुरिया said...

ये तो बडी लाजवाब चर्चा है.

रामराम.

श्यामल सुमन said...

बाल की खाल सफलतापूर्वक निकालने का कमाल। रोचक पोस्ट।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

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