Wednesday, June 17, 2009

अंग्रेजी अखबार ने स्वीकारा, भूल हुई

जयहिंदी के एक पिछले पोस्ट में मैंने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ओफ इंडिया द्वारा की गई छापे की एक महा भूल की जानकारी दी थी। इस अखबार ने सोमवार, जून 15, के संपादकीय पृष्ठ को हुबहू मंगलवार, जून 16, के अखबार में दुबारा छाप दिया था।

इसके ठीक अगले दिन, यानी आज बुधवार, जून 17 को, टाइम्स ओफ इंडिया ने इस भूल को स्वीकारा और आज के संस्करण में बहुत ही छोटे टाइपों में दो पंक्तियों वाली यह भूल-सूचना छापी -

8 Comments:

लवली कुमारी / Lovely kumari said...

अब कहानी खत्म ..उन्होंने गलती मान ली ..इतना किसी हिंदी अख़बार ने किया होता तब ..आफत ही हो जाती

संजय बेंगाणी said...

जब अंग्रेजी में "सॉरी" बोल दिया है तो माफ करना ही पड़ेगा ना.

नितिन बागला said...

संजय भाई...माफी नही मांगी है...सिर्फ ’खेद व्यक्त’ किया है।

मुनीश ( munish ) said...

Let us not make it a case of Hindi v/s English . In the first place i doubt calling this paper a 'news paper' .
If u see itz Delhi edition u will realize this is merely a roll of 'toilet paper' being sold as news paper. But people luv it so fault lies with them as well .
The content of this paper's magazine section has surpassed all the limits of decency and decorum , but it sells bhai ,it sells and i refuse to have coffee with the readers of this paper! However, we can have tea sir!!

मिहिरभोज said...

अरे भाई काहे इतनी चिल्ल पौं मचाये हो वैसे भी अंग्रै्जी अखबारों मै नया लिखने को क्या होता है ....और यदि बिना बदले लिख भी दिया तो क्या अंग्रैजी अखबारों की कोई गलती निकालते है क्या

Dharmendra B Chouhan said...

ठीक कहा सर आपने इतनी बड़ी गलती की इतनी सी माफी। मैंने भी अपने ब्‍लॉग पर इस बारे में लिखा है। dharmendrabchouhan.blogspot.com

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

वाकई गलती हुई। गाज किस पर गिरी होगी?

GAURAV said...

sorrry dekhne me jitni choti hai....english me eska prayog bahut hi unche paimane par kiya jata hai

हिन्दी ब्लॉग टिप्सः तीन कॉलम वाली टेम्पलेट