Monday, June 29, 2009

जब आपके बच्चे का हो यौन शोषण - 2

कौन होता है शोषक?


बच्चों का यौन शोषण समाज के हर स्तर पर देखा जाता है। अमीर से अमीर घरों के बच्चे भी इससे बचे नहीं रहते। और यौन शोषकों की फिहरिस्त में दुनिया के चोटी के लोगों से लेकर साधारण से साधरण व्यक्ति शामिल हैं। अभी कुछ दिन पहले दिवंगत हुए पोप स्टार माइकल जैकसन पर भी बाल यौन शोषण का आरोप लगा था। अन्य मशहूर यौन शोषकों में अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, मशहूर अंग्रेज विज्ञान कथा लेखक आर्थर क्लार्क आदि शामिल हैं।

शोषक अक्सर वयस्क होता है, मगर वह एक बड़ा या ज्यादा शक्तिशाली लड़का (या लड़की) भी हो सकता है। शोषित तो हमेशा बच्चे ही होते हैं। लड़के और लड़कियां दोनों बाल यौन शोषण के शिकार बनते हैं।

यौन शोषण के अधिकतर मामलों में शोषक बच्चों का कोई परिचित व्यक्ति ही होता है, जिसमें स्वयं उनके माता-पिता भी शामिल हैं। आए दिन अखबारों में पढ़ने को मिलता है कि किसी बच्ची का यौन शोषण उसके ही पिता के हाथों हुआ है।

अपने बच्चों को विशेष रूप से इन व्यक्तियों से सवधान रहना सिखाइए –

1. घर के उनसे अधिक बड़े सदस्य से जिनमें अन्य बच्चे भी शामिल हैं
2. पड़ोसी
3. अक्सर घर आनेवाले रिश्तेदार, मित्र, तथा उनके परिवारजन
4. खेलने, पढ़ने या अन्य कारणों से जिन घरों, दुकानों, इमारतों या अन्य स्थलों में बच्चे जाते हैं, वहां मौजूद लोग
5. घर के नौकर
6. ऐसे अजनबी जो बिना कारण उनसे मित्रता जताते हैं
7. खेलने की जगहों में आनेवाले उनसे बड़े बच्चे

बच्चों को हर ओर से खतरा है। बाल यौन शोषक हम-आप जैसा ही कोई व्यक्ति होता है। इतना ही नहीं, वह बच्चों का अत्यंत परिचत, चहेता रिश्तेदार (पिता, चाचा, भाई), पड़ोसी या मित्र हो सकता है। इसलिए बच्चों को हर वक्त सावधान रहने की जरूरत है। जिस तरह सड़क पार करते समय हम बच्चों को सावधान रहना सिखाते हैं, उसी तरह उनके साथ दूसरे लोग जिस तरह का व्यवहार करते हैं, उसे परखने-समझने की क्षमता भी हमें बच्चों में विकसित करनी चाहिए। अनुचित व्यवहार का विरोध करने की दृढ़ता उनमें पैदा करनी चाहिए।

(... जारी)

इस लेख माला के अब तक के लेखों की कड़ियां
1. विषय प्रवेश

2 Comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

अरे! ये सावधानियाँ पहले संयुक्त परिवार में पारंपरिक रूप से रखी जाती थीं, सिखाई जाती थीं।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

अपने बच्चों को विशेष रूप से इन व्यक्तियों से सवधान रहना सिखाइए –

1. घर के उनसे अधिक बड़े सदस्य से जिनमें अन्य बच्चे भी शामिल हैं
2. पड़ोसी
3. अक्सर घर आनेवाले रिश्तेदार, मित्र, तथा उनके परिवारजन
4. खेलने, पढ़ने या अन्य कारणों से जिन घरों, दुकानों, इमारतों या अन्य स्थलों में बच्चे जाते हैं, वहां मौजूद लोग
5. घर के नौकर
6. ऐसे अजनबी जो बिना कारण उनसे मित्रता जताते हैं
7. खेलने की जगहों में आनेवाले उनसे बड़े बच्चे

उपयोगी जानकारी के लिए आभार।

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