Monday, May 18, 2009

क्या आप सांस की दुर्गंध से परेशान हैं?

सांस से बदबू आना एक ऐसी असुविधाजनक बीमारी है जिसके बड़े ही अटपटे सामाजिक परिणाम होते हैं। उसके कारण व्यक्ति को काफी मानसिक क्लेश भी सहना पड़ता है और उसमें हीन ग्रंथि भी पनप सकती है। कई बार यह बीमारी सामाजिक सफलता में बाधक भी बन सकती है।

हमारा मुंह वास्तव में अनेक प्रकार के जीवाणुओं का जंगल होता है। ये जीवाणु दांतों के पोरों में और जीभ, मसूढ़े आदि में अटके हुए भोजन के कणों पर जीवित रहते हैं। इनमें से बहुत से जीवाणुओं के क्रियाकलापों से ऐसी गैसें प्रकट होती हैं, जो दुर्गंधयुक्त होती हैं। इन्हीं गैसों के कारण हमारी सांस बदबूदार हो जाती है। तब फिर हर व्यक्ति के मुंह से दुर्गंध क्यों नहीं आती, और हम कभी-कभार ही इस बीमारी का शिकार क्यों बनते हैं, हर समय क्यों नहीं? इसका उत्तर सरल है। हमारे मुंह में जो लार निरंतर बनती रहती है, उसमें जीवाणुनाशी शक्ति होती है। लेकिन जब किसी कारण से मुंह में कम लार बनती है या लार सूख जाती है, तब ये जीवाणु बेकाबू हो जाते हैं, और तब सांस दुर्गंधयुक्त हो जाती है। मसलन जब हम सोते हैं, तो लार का प्रवाह धीमा पड़ जाता है और जीवाणु इसका लाभ उठाकर पनपने लगते हैं। सुबह उठने पर मुंह से बदबू आने का यही कारण है। भूख-प्यास, सिगरेट-शराब पीना, अत्यधिक बात करना, बंद नाक के दौरान मुंह से सांस लेना -- इन सबके कारण मुंह सूख जाता है और सांस दूषित हो जाती है। तनाव भी मुंह सूखने का एक कारण है।

उम्र के साथ शरीर के अधिकांश अंगों की कार्यक्षमता घटने लगती है। लार पैदा करने वाली ग्रंथियां भी इसका अपवाद नहीं हैं। यही वजह है कि युवाओं की तुलना में बुजुर्ग कहीं अधिक दुर्गंधयुक्त सांस की समस्या से पीड़ित होते हैं। शिशुओं में लार की प्रचुरता रहती है, इसलिए उनकी सांस एक विशिष्ट भीनी मीठी गंध लिए रहती है।

मुंह सूखने से उठी सांस की दुर्गंध आसानी से दूर की जा सकती है। आपको बस इतना करना है जिससे आपके मुंह की लार-ग्रंथियां पुनः सक्रिय हो उठें। इसके लिए आप मिसरी चूसें या पान खाएं या एक गिलास पानी ही पी लें, तुरंत आपके मुंह की दुर्गंध चली जाएगी। खाना खाने से भी मुंह की दुर्गंध दूर हो जाती है, क्योंकि खाते समय मुंह में बहुत अधिक लार बनती है, जो मुंह के अधिकांश जीवाणुओं को नष्ट कर देती है या उन्हें भोजन के साथ पेट के अंदर बहा ले जाती है।

दांतों को मांजने से भी सांस की दुर्गंध से निजात मिल जाती है क्योंकि यह अनेक दुर्गंधजनक जीवाणुओं को साफ कर डालता है, विशेषकर तब जब जीभ, तालू और गालों के भीतरी भाग और मसूढ़ों को भी साफ किया जाए क्योंकि इन जगहों में भी बहुत से जीवाणु छिपे रहते हैं।

मुंह की दुर्गंध से पीड़ित लोगों को माउथवाश से मुंह धोने की सलाह दी जाती है, पर अनेक परीक्षणों से सिद्ध हो चुका है कि इससे कुछ भी लाभ नहीं होता। माउथवाश बस इतना फायदा करता है कि वह सांस की दुर्गंध पर अपनी सुगंध का मुलम्मा चढ़ा देता है, पर यह प्रभाव भी एक घंटे से ज्यादा नहीं रहता। कुछ माउथवाशों के बारे में यह दावा किया जाता है कि उनमें जीवाणुओं को मारने की क्षमता होती है, पर उनसे उल्टा प्रभाव ही पड़ता है क्योंकि उनमें जो जीवाणुनाशी पदार्थ होता है, वह अलकहोल होता है, जो मुंह को और अधिक सुखा देता है।

मुंह से दुर्गंध आने का एक अन्य कारण आपके द्वारा खाई गई कुछ चीजें होती हैं, जैसे लहसुन। लहसुन खाने के बाद उसके गंध-यौगिक खून के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं, जहां से निःश्वास की हवा को दूषित करते हैं।

आहार संबंधी दूषित सांस का कोई पक्का उपचार नहीं है। बस आपको गंध के अपने आप खत्म होने की प्रतीक्षा करनी है। खाने के साथ खूब पानी पीने से कुछ मदद मिल सकती है। कुछ लोगों में पाचन की गड़बड़ी के कारण भी सांस की दुर्गंध हो सकती है। हमारे पेट में ऐसे जीवाणु होते हैं जो पाचन के दौरान पैदा हुई दुर्गंधयुक्त वायु को नष्ट करते हैं। कुछ लोगों में ये जीवाणु नहीं होते, जिससे उनकी डकार में यह दुर्गंधयुक्त वायु बाहर निकलती रहती है।

सांस की दुर्गंध कुछ बीमारियों का संकेत भी हो सकती है। उदाहरण के लिए जब साइनस की बीमारी होती है, तो सांस से दुर्गंध आने लगती है। साइनस के कारण व्यक्ति की नाक अवरुद्ध हो जाती है और वह मुंह से सांस लेने लगता है। इससे मुंह सूख जाता है और जीवाणुओं को पनपने का अवसर मिल जाता है।
कुछ प्रकार की दवाइयां खाने से भी सांस की दुर्गंध बढ़ जाती है। इन दवाइयों में शामिल हैं प्रशांतक, मूत्रवर्धक एवं रक्तचापहारी दवाएं। ये लार के प्रवाह को भी कम कर देती हैं, जिससे जीवाणुओं को बढ़ने का मौका मिल जाता है।

यद्यपि सांस की बदबू हमारी सामाजिक प्रतिष्ठा को काफी नुक्सान पहुंचा सकती है, उसका उपचार आसान है, यानी मुंह की स्वच्छता बरतना और मुंह को सूखने से बचाना। अतः यदि आपकी सांस से बदबू आती हो, तो दिन में दो-तीन बार दांतों, जीभ एवं मसूढ़ों को साफ करें। यदि मुंह सूख रहा हो तो तुरंत पानी पी लें या कोई खाने की चीज मुंह में डाल कर चबाने लग जाएं।

7 Comments:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

उपयोगी जानकारी है। आभार।


-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

दीपक कुमार भानरे said...

ज्ञान वर्धक जानकारी के लिए धन्यवाद.

Mired Mirage said...

जानकारी के लिए आभार।
घुघूती बासूती

संगीता पुरी said...

इतनी बढिया जानकारी के लिए आभार।

अनुनाद सिंह said...

बहुत उपयोगी जानकारी! यह समस्या बहुत आम है। एक आदमी को फायदा हो तो कितने सारे लोगों को सुविधा होगी!

Shastri said...

अति उपयोगी जानकारी !

सस्नेह -- शास्त्री

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
http://www.Sarathi.info

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

आश आपका यह आलेख मेरे कार्यालय में आने वाले कुछ बुजुर्ग पेंशनर पढ़ लेते। सामाजिक अवसरों पर यह बीमारी अकथनीय समस्या से दो-चार कराती है।

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