Saturday, May 09, 2009

गरमी से बचिए

नीचे दिए गए घरेलू नुस्खों से पंखों और कूलरों को अधिक कार्यक्षम बनाएं और गरमी से बचें।

  • पानी के वाष्पन से ठंडक लानेवाले कूलर उन क्षेत्रों में अधिक कारगर होते हैं जहां हवा में नमी की मात्रा कम हो। परंतु उनके ठीक प्रकार से काम करने के लिए कमरे में उनके ठीक सामने हवा की निकासी के लिए मार्ग होना चाहिए, जो खिड़की आदि के रूप में हो सकता है। इस पर एक्जोस्ट पंखा लगा देने से और भी अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

  • कूलर के पंखे के चारों ओर लगी खसखस की जाली में कहीं भी रिक्त स्थान नहीं होना चाहिए। जाली की सतह समान रूप से गीली रहनी चाहिए। यदि कूलरों में ऐसा पंप लगा हो जो निरंतर चलता रहता हो, तो इससे कमरे में उमस की मात्रा बहुत बढ़ जाएगी। इसलिए पंप के साथ टिंबर स्विच फिट करके देखिए। इस उपकरण से पंप दो-चार मिनट चलकर अपने-आप बंद हो जाएगा, और कुछ देर बाद पुनः चालू हो जाएगा। इस प्रकार के स्विच को फ्रिज आदि में काम करते आपने देखा होगा। इससे कमरा उमसभरा होने से तो बचेगा ही, पानी और बिजली की खपत भी घटेगी।

  • छत पर लटकाए जानेवाले बिजली के पंखे तभी कारगर होते हैं जब उनके फलकों और छत के बीच में आधे मीटर का फासला हो। यदि इससे कम फासले पर पंखे लटकाए जाएं, तो पंखे के कारण कमरे में हवा का ठीक संचरण नहीं होगा और पंखे के ठीक नीचे बैठे लोगों को ही हवा लगेगी। यदि आपके घर में छत बहुत नीची हो तो छत पर लटकाए जानेवाले पंखों के स्थान पर टेबल फैन अथवा पेडेस्टल फैन का उपयोग करें।

5 Comments:

अनुनाद सिंह said...

आपने बहुत सामयिक जानकारी दी है लेकिन कुछ उनके लिये भी बताना चाहिये जिनके पास बिजली और पंखे नहीं हैं।

अक्षत विचार said...

upyogi jankari..

Udan Tashtari said...

बहुत अच्छी जानकारी. आभार.

संगीता पुरी said...

अच्‍छी उपयोगी जानकारी .. धन्‍यवाद।

बालसुब्रमण्यम said...

अनुनाद जी, जिनके पास बिजली और पंखे नहीं हैं, वे कहां जयहिंदी को पढ़ने जा रहे हैं, उनके लिए इसमें लिखकर भी क्या फायदा? अखबारों का ही सहारा लेना पड़ेगा, पर कई के लिए तो काले अक्षर भैंस बराबर हैं। ऐसे में क्या करूं समझ नहीं पड़ता। गांव-गांव जाकर ही संदेश फैलाना पड़ेगा, उसमें अभी वक्त लगेगा।

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