Sunday, May 24, 2009

तपेदिक के शिकंजे में कसता भारत

तपेदिक भारत में एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रहा है। आई.सी.एम.आर. द्वारा किए गए राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण से पता चला है कि भारत की कुल आबादी का लगभग 1.5 प्रतिशत तपेदिक का शिकार है। लगभग 40 प्रतिशत आबादी में तपेदिक जीवाणु मौजूद है, यद्यपि यह आबादी बीमारी की चपेट में अभी नहीं आई है। हर साल 25-30 लाख नए तपेदिक के रोगी होते हैं। अनुमानतः 5 लाख व्यक्ति हर साल तपेदिक के कारण मरते हैं। ऐड्स बीमारी के तेजी से फैलने से तपेदिक और विकराल रूप धारण कर रहा है। आज भारत में जितने भी ऐड्स के मरीज हैं, उनमें से 60 प्रतिशत तपेदिक के भी शिकार हैं।

नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान के निदेशक श्री के।के। दत्ता हेल्थ मानिटर नामक पत्रिका में प्रकाशित एक लेख में कहते हैं कि देश में 1-1.5 करोड़ तपेदिक के रोगियों का होना संभव है। तपेदिक के मरीज शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में समान रूप से पाए जाते हैं।

राष्ट्रीय तपेदिक नियंत्रण कार्यक्रम 1962 से सक्रिय है, लेकिन इससे तपेदिक को नियंत्रण में लाने में सफलता नहीं मिली है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत देश के हर जिले में कम-से-कम एक तपेदिक केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 85 प्रतिशत जिलों में, यानी 480 जिलों में से 391 में तपेदिक केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनके अलावा 330 तपेदिक दवाखाने भी देश के अनेक शहरों और कसबों में कार्य कर रहे हैं। देश के अस्पतालों में तपेदिक के मरीजों के इलाज के लिए 47,000 बिस्तरों की क्षमता है।

3 Comments:

निशांत मिश्र - Nishant Mishra said...

सुब्रमण्यम जी आपने ब्लौग के लिए अच्छा टेम्पलेट चुना है लेकिन मुख्यपृष्ठ पर सिर्फ दो पोस्टें ही क्यों? जहाँ तक साइडबार नीचे जा रहे हैं वहां तक पोस्टों का नियोजन बढ़िया लगेगा. अच्छी पोस्ट के लिए आभार.

बालसुब्रमण्यम said...

निशांत जी इस सुझाव के लिए आभार, अभी सेटिंग को ठीक करता हूं।

अनुनाद सिंह said...

इससे बचने का उपाय क्या है? हो जाने पर कौन सा उपचार सबसे प्रभावी होता है?

हिन्दी ब्लॉग टिप्सः तीन कॉलम वाली टेम्पलेट