Thursday, July 23, 2009

अब तो नाइजीरिया के फरेबी भी हिंदी बोल रहे हैं

मैं कितना खुशनसीब हूं इसकी याद दिलानेवाले ईमेल मुझे नाइजीरिया से हर दिन आते रहते हैं, जिनमें यह जानकारी होती है कि मेरा ईमेल पता किसी लोटरी में विजयी रहा है और मुझे 1000,000 डालर ईनाम मिल गया है जिसे क्लेम करने के लिए मुझे किसी नंबर पर फोन भर करना है या किसी ईमेल पते पर पत्र भर भेजना है।

आप भी शायद मुझ जितने ही खुशनसीब होंगे, और आपको भी इस तरह के ईमेल आते होंगे।

पर आज एक अनोखी बात हुई। अब तक इस तरह के ईमले “विश्व भाषा” अंग्रेजी में ही आते थे। लेकिन आज मुझे ऐसा एक ईमेल हिंदी में मिला, आप भी देखिए।

प्रिय लकी विजेता,

अपने ईमेल पते $ 500,000.00 की कुल राशि का दावा करने के लिए अनुमोदित किया गया है. अपनी जीत से संपर्क करें हमारे एजेंट में दावा करने के लिए
लागोस, नाइजीरिया.

संपर्क: Rev. क्रिश्चियन Evra
ई मेल: rev.christianevra@y7mail.com
फोन: +2347035027309

बधाई.

जस्टिन होल्म्स

अब जब फरेबी भी हिंदी अपना रहे हैं, हिंदी का भविष्य निश्चय ही उज्ज्वल है। जस्टिन का यह ईमेल दो बातों का प्रमाण दे रहा है

1. हिंदी का दर्जा अब अंग्रेजी के स्तर का हो गया है और वह विश्व भाषा बन चुकी है और
2. लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए हिंदी भी अंग्रेजी जितनी उपयोगी हो गई है।

अब कोई नहीं कह सकेगा कि हिंदी से रोजगार के द्वार नहीं खुलते। कम से कम जस्टिन जी के लिए तो यह आमदनी का प्रमुख स्रोत मालूम दे रहा है।

7 Comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

हिन्दी पढ़ने वालों की संख्या महत्वपूर्ण होती जा रही है।

अनूप शुक्ल said...

मतलब बेवकूफ़ बनने के लिये अंग्रेजी जानना जरूरी नहीं है!

yuva said...

फरेब के मामले में हिंदी ने अंग्रेजी के छक्के छुडाने शुरू कर दिए. अब धीरे-धीरे दूसरे इलाके में भी घुसपैठ होगी!

गिरिजेश राव said...

अरे, यह आप के पास भी आया? मैं तो सोच रहा था कि कोई हिन्दी का प्रेमी मजाक कर रहा है। थोड़ी देर केलिए शक की सुई. . .समझ गए ना ;)


जल्दी से डॉलर भँजाइए और एकाध लाख मुझे भी भेजिए। आज कल तंगी चल रही है।

महामंत्री - तस्लीम said...

SAAVDHAAN.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Vivek Rastogi said...

ये ईमेल तो हमारे पास भी आया था, हम इस प्रकार के ईमेल को स्पाम का रास्ता दिखा देते हैं।

बालसुब्रमण्यम said...

विवेक जी : नई बात यह है कि इस बारे ये ईमेल हिंदी में थे। पहले अंग्रेजी में आते थे।

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