Wednesday, August 12, 2009

मनुष्य को गरम खाना क्यों पसंद है?

मानव निरीक्षण - 2

जब आप किसी होटल में जाते हैं और खाना मंगाते हैं, तो आप वेटर को कई बार यह हिदायत देना नहीं भूलते कि गरमा गरम खाना ले आओ।

क्या आपने सोचा है कि हमें गरम खाना ज्यादा पसंद क्यों आता है? आखिर गरम और ठंडे खाने में पौष्टिकता की दृष्टि से कोई फर्क नहीं होता। उल्टे, कुछ प्रकार के भोजन के पौष्टिक गुण गरम करने पर नष्ट ही होते हैं, जैसे विटामिन। फिर भी हमें गरम भोजन ही पसंद आता है। क्यों?

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह उस समय की लगी आदत है जब मनुष्य ने मांस-भक्षण शुरू किया था। पहले मनुष्य गोरिल्ला, ओरांग गुटान आदि नरवानरों के समान मुख्यतः फल-फूल और अन्य वानस्पतिक पदार्थ ही खाता था। उस समय वह वृक्षों पर ही निवास भी करता था। बाद में पृथ्वी की जलवायु में परिवर्तन हुआ और वन कम होने लगे, और मैदान और खुले प्रदेश अधिक हो गए। मनुष्य को इनमें जीना सीखना पड़ा। इससे उसके शरीर में और आदतों में अनेक परिवर्तन हुए। वह दो पैरों में चलने लगा, उसका शरीर बालहीन हो गया और वह मांस खाने लगा। मैदान में उसे फल-फूल मिलने से रहे, वहां हिरण, मृग, खरगोश आदि तृणभक्षी की ही अधिकता थी। मनुष्य की पाचन व्यवस्था ऐसी नहीं थी कि वह सीधे घास खा सके। उसे वह पचा नहीं पाता। इसलिए उसे इन जानवरों को ही पकड़कर उनका मांस खाना पड़ा। पर यह नया भोजन उसे बिलकुल भी रास नहीं आया। कच्चे मांस में कोई स्वाद नहीं होता है, जब कि फल-फूल आदि में नमक, मिठास, खटास, सुगंध आदि भरपूर मात्रा में होते हैं। इनके कारण ये पदार्थ खाने में अधिक स्वादिष्ट होते हैं। मांस को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए मनुष्य ने उसे आग में भूनना शुरू किया इससे मांस न केवल नरम हो जाता है, बल्कि जलकर और पककर वह सुगंधित भी हो उठता है। इससे मनुष्य को वह अधिक जायकेदार लगता है।

इसी कारण से आज भी हम गरम खाना खाना पसंद करते हैं। खाने को गरम करने पर होता यह है कि उसके गंध युक्त अंश खूब सक्रिय हो जाते हैं और वे हमारे नथुनों में पहुंचकर हमें खूब उत्तेजित करने लगते हैं। इससे हमारे मस्तिष्क को वह भोजन अधिक स्वादिष्ट प्रतीत होने लगता है।

पर वैज्ञानिक थियोरियों को थोड़ा नमक-मिर्च मिलाकर ही स्वीकारना चाहिए, क्योंकि स्वयं वैज्ञानिक अपनी थियोरियों को बदलते रहते हैं। वैज्ञानिक सिद्धांतों के साथ धार्मिक कट्टरपन से चिपके रहने से अपनी ही फजीहत होगी। अब इसी थ्योरी को लिजिए। इसे धराशायी करने के लिए रोजमर्रा के जीवन की बस एक छोटी सी चीज पर विचार करना पर्याप्त होगा। आज कोई भी इन्कार नहीं करेगा कि सबसे स्वादिष्ट जंक फुड़ों में आइसक्रीम शामिल है। अब आप ही बताइए आईसक्रीम को गरमागरम परोसा जाए तो उसके स्वाद में इजाफा होगा या स्वाद बिलकुल बिगड़ जाएगा!

6 Comments:

Arvind Mishra said...

क्या खूब जानकारी

गिरिजेश राव said...

आप के लेख के शीर्षक को देख सोचा था कि आइसक्रीम के बहाने ठिठोली करेंगे लेकिन आप ने तो खुद ही लिख डाला है।

दिल्ली से लगे एक इलाके (सम्भवत: रेवाड़ी) में 'आइसक्रीम पकौड़ा' व्यञ्जन सुनने में आता है। बेसन में खूब कठोर आइसक्रीम को लपेट कर जालीदार कलछुले में रख खौलते तेल के कड़ाहे में एक छोर से दूसरे छोर तक डुबाते हुए फुर्ती से निकाल दिया जाता है।
इसे क्या कहेंगे? गर्म या ठंडा?

Vivek Rastogi said...

बिल्कुल सही कहा है अपनी जबान को चटपटी चीजें खाने की आदत जो पड़ गई है।

बालसुब्रमण्यम said...

गिरिजेश जी, यह आईसक्रीम पकोड़े की बात मजेदार बताई आपने। अगली बार दिल्ली जाने पर इसकी खोज-खबर करनी पड़ंगी। पर खौलते तैले में डुबोने से आईस्क्रीम पिघल नहीं जाता होगा?

गिरिजेश राव said...

एक छोर से लगाते हुए दूसरे से झटके से निकाल देते हैं। fraction of second | मैंने भी सुना भर है देखा नहीं।

अर्शिया अली said...

Haardik Aabhaar.
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