Monday, August 03, 2009

महाभारत किसने लिखा?

आप सोच रहे होंगे, यह भी कैसा सवाल है। कौन नहीं जानता कि महाभारत को व्यास ऋषि ने लिखा है। पर आपका यह उत्तर गलत है। विश्वास नहीं होता? तो पढ़िए आगे।

जब भगवान व्यास ने महाभारत की कहानी मन में रच ली थी तो उनके सामने एक गंभीर समस्या आ खड़ी हुई। व्यास जी महाभारत को काव्य रूप देना चाहते थे और चूंकि महाभारत बहुत लंबा और जटिल था, यह बहुत जरूरी था कि कोई विद्वान उसे जैसे-जैसे वे बोलते जाते, लिखता जाए। विद्वान भी ऐसा हो कि लिखते वक्त कोई गलती न करे।

यह सचमुच एक विकट समस्या थी जिसे सुलझाने में व्यास जी असमर्थ थे। इसलिए उन्होंने ब्रह्माजी का ध्यान किया। जब ब्रह्मा प्रत्यक्ष हुए तो व्यास ने अपनी समस्या उनके सामने रखी।

ब्रह्मा यह जानकर बहुत प्रसन्न हुए कि व्यास ने इतने महान काव्य की रचना कर ली है। उन्होंने आशीर्वाद देते हुए कहा, गणेश की सहायता लें।

व्यास जी गणेश के पास पहुंचे। उनकी परेशानी सुनकर गणेश महाभारत को लिखने को राजी तो हुए, किंतु उन्होंने एक शर्त रखी, कलम एक बार उठा लेने के बाद काव्य समाप्त होने तक मुझे बीच में न रुकना पड़े।

व्यास जी समझ गए कि यदि वे इस शर्त को मान लेते हैं, तो आगे चलकर कठिनाइयां उत्पन्न होंगी। इसलिए उन्होंने भी एक शर्त रखी। वह यह कि लिखने से पहले गणेश को हर श्लोक का अर्थ समझना होगा।

बीच-बीच में व्यासजी कुछ कठिन श्लोक रच देते और जब गणेश उनके अर्थ पर विचार कर रहे होते, तो कुछ और श्लोक वे रच देते और इस तरह महाभारत लिखा गया, रचयिता व्यास द्वारा नहीं, बल्कि गणेश जी द्वारा।

6 Comments:

संजय बेंगाणी said...

यह जानकारी तो थी. साथ ही गणेशजी ने अपने एक दाँत को तोड़ कर उससे महाभारत लिखा था.

गणेश फिलांसर बने थे :)

Mohammed Umar Kairanvi said...

अच्छा जी हम भी ध्‍यान लगाकर सुन रहे हैं,

Arvind Mishra said...

फिर रचयिता कौन हुआ ?

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

गणेश जी के लिख देने के बाद व्यास जी ने उसे जाँचा या नहीं इस का पता नहीं। गणेश जी ने जो मन चाहा लिख दिया वह भी तो इसी में शामिल होगा।

परमजीत बाली said...

अच्छी जानकारी है

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

चलिये आपने सीधे सीधे बता दिया! वर्ना हिन्दी ब्लॉगरी में तो पहेली पूछने का रिवाज है! :)

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