Wednesday, August 19, 2009

एडोब इनडिजाइन सीएस4 और हिंदी

विश्व भर में डीटीपी के लिए अब अधितर एडोब इनडिजाइन का ही उपयोग हो रहा है। इसने अपने प्रतिद्वद्वी डीटीपी सोफ्टवेयरों को या तो कहीं पीछे छोड़ दिया है, या उन्हें खरीदकर अपने में मिला लिया है। पहले वर्ग में आते हैं क्वार्क एक्सप्रेस, फ्रंटपेज, और माइक्रोसोफ्ट पब्लिशर, और दूसरे वर्ग में आता है, पेजमेकर।

पर जहां तक यूनिकोड एनकोडिंग में हिंदी डीटीपी का संबंध है, माइक्रोसोफ्ट पब्लिशर को छोड़कर उपर्युक्त सभी डीटीपी सोफ्टवेयर अनुपयुक्त हैं, क्योंकि वे हिंदी के लिए यूनिकोड एनकोडिंग का समर्थन नहीं करते हैं। इससे बड़ी दिक्कतें आती हैं, क्योंकि एक ही सामग्री को वेब साइट और प्रिंट के लिए नहीं उपयोग किया जा सकता। वेब साइट के लिए यूनिकोड एनकोडिंग में, यानी मंगल, एरियल यूनिकोड एमएस आदि फोंटों में सामग्री को तैयार करना पड़ता है, और प्रिंट के लिए कृतिदेव, डीवी-टीसुरेख, युवराज आदि गैर-यूनिकोड फोंटों में, ताकि पेजमेकर, इनडिजाइन, फ्रंटपेज, आदि में अक्षर-विन्यास (लेआउट) किया जा सके। इससे डबल मेहनत तो होती ही है, आगे सामग्री को अद्यतन करते समय भी खूब परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसा विशेषकर सोफ्टेवेयर मैन्यएलों के संबंध में आता है। इनके नए संस्करणों में यहां-वहां थोड़ा-बहुत परिवर्तन रहता है और बाकी सब सामग्री पहले के जैसे ही रहती है। पर हिंदी का मुद्रित मैनुअल कृतिदेव आदि गैरयूनिकोड फोंट में होने से ट्रेडोस आदि उन्नत शब्दसाधन और अनुवाद सोफ्टवेयर का उपयोग करके तेजी से इन अंशों को ठीक करना असंभव होता है। करना यह पड़ता है कि पहले यूनिकोड-एनकोडिंग वाली फाइलों में ये सुधार करने के बाद फाइल को या तो दुबारा कृतिदेव में टाइप कर दिया जाए, या फोंट कन्वर्टरों का प्रयोग करके मंगल आदि फोंट से कृतिदेव आदि में सामग्री को बदल दिया जाए। पर अब तक ऐसे कनवर्टर नहीं बन पाए हैं जो शतप्रतिशत परिशुद्धता के साथ मंगल आदि की सामग्री को कृतिदेव आदि में बदलकर दे। इससे फोंट-परिवर्तित सामग्री का बारीकी से प्रूफ-शोधन करना आवश्यक हो जाता है, जिसेम समय, श्रम और पैसा खूब लगता है। एक अन्य समस्या यह है फोंट कन्वर्टर केवल टेक्स्ट या वर्ड फाइलों को ही संभाल पाते हैं, इंडिजाइन की जैसी अधिक जटिल फाइलों को ले नहीं पाते हैं।

परंतु खुशी की बात यह है कि अब एडोब जैसे सोफ्टवेयर निर्माता अपने सोफ्टवेयरों में यूनिकोड एनकोडिंग में हिंदी के लिए धीरे-धीरे समर्थन मुहैया कराते जा रहे हैं, जो हिंदी के तेजी से विश्व भाषा बनते जाने का ही प्रमाण है, क्योंकि यदि विश्व भर में हिंदी की पर्याप्त मांग न रहने पर, ये विदेशी सोफ्टवेयर कंपनियां, जो पूर्णतः व्यावसायिक मानदंडों और मुनाफे की संभावना पर काम करती हैं, अपने सोफ्टवेयरों में हिंदी का समर्थन शामिल करने में समय, श्रम और पैसा नहीं खर्च करतीं।

इस मामले में माइक्रोसोफ्ट सबसे आगे रहा है और उसकी लगभग सभी प्रमुख सोफ्टवेयर यूनिकोड-एनकोडिंग में हिंदी का समर्थन करते हैं। माइक्रोसोफ्ट का डीटीपी सोफ्टवेयर पब्लिशर है, जो पूर्णतः यूनिकोड हिंदी का समर्थन करता है। पर माइक्रोसोफ्ट की सिद्धहस्तता प्रचालन तंत्र (विंडोस), ब्राउसर (इंटरनेट एक्सप्लोरर) और शब्द साधन (एमस वर्ड) में है, न कि डीटीपी में। इसलिए पब्लिशर इनडिजाइन के सामने फीका है, और अधिक लोग उसका उपयोग भी नहीं करते हैं। अभी विश्वभर में डीटीपी के लिए इनडिजाइन का ही ज्यादा उपयोग होता है।

इनडिजाइन का ताजा संस्करण सीएस4 के नाम से जाना जाता है, सीएस यानी क्रिएटिव स्यूट। इससे पहले के संस्करणों का नाम सीएस3, सीएस2 आदि है। एडोब क्रिएटि सूट वास्तव में डीटीप, वेबडिजाइन, एनिमेशन आदि में उपयोगी साबित होनेवाले कई उम्दा सोफ्टवेयरों का समुच्चय है, जिसमें शामिल हैं, फोटोशोप, इलस्ट्रेटर, फ्लैश, ड्रीमवीवर, और इंडिजाइन।

आइए देखें इनडिजाइन के ये सब संस्करण यूनिकोड हिंदी का किस हद तक समर्थन करते हैं।

इनडिजाइन सीएस2 और सीएस3

सीएस2 और सीएस3 में हिंदी का समर्थन नहीं है। पर एक भारतीय कंपनी ने ऐसे प्लग-इन विकसित किए हैं, जिन्हें लगाने से सीएस2 और सीएस3 में यूनिकोड हिंदी में काम किया जा सकता है।

इस कंपनी का नाम है मेटाडिजाइन और प्लग-इन का नाम है इंडिक-टूल्स। इस प्लग-इन की कीमत है 110 डालर। इसे लगाने पर न केवल इंडिजाइन में यूनिकोड हिंदी का अक्षर-विन्यास ठीस से हो सकता है, बल्कि शब्दकोश समर्थन भी प्राप्त होता है, यानी वर्तनी की त्रुटियां भी रखांकित होती हैं।

इस कंपनी का वेब साइट यह है –
http://www.metadesignsolutions.com/IndicPlus.html


इंडिजाइन सीएस4


अब आते हैं इनडिजाइन सीएस4 पर जो इनडिजान का नवीनतम संस्करण है। खुशी की बात यह है कि इसमें यूनिकोड हिंदी के लिए पूर्ण समर्थन है, पर एडोब ने इन सुविधाओं तक पहुंचने के लिए जो इंटरफेस आवश्यक है उसे विकसित नहीं किया है। मतलब यह, कि सीएस4 में यूनिकोड हिंदी में काम करना संभव नहीं है। पर इसके लिए भी उत्कृष्ठ प्लग-इन उपलब्ध है। इस प्लग-इन का नाम है वर्ल्ड रेडी कंपोसर। उसकी कीमत 49 डालर है। उसे इस वेब साइट से डाउनलोड/खरीदा जा सकता है–

http://www.in-tools.com/plugin.php?p=8

यहां से उसका 20 दिनों का फुल-फंक्शन वाला ट्रायल वर्शन भी खरीदा जा सकता है। इसे लगाने पर इनडिजाइन सीएस4 में यूनिकोड हिंदी के साथ काम किया जा सकता है। पर इस प्लग-इन में शब्दकोश समर्थन नहीं है।

मजे की बात यह है कि उपर्युक्त वर्ल्ड रेडी कंपोसर प्लग-इन के ट्रायल संस्करण का 20 दिन का समय निकल जाने के बाद भी, उस दौरान सेव की गई इंडिजाइन सीएस4 की फाइलों में यह इंटरफेस बना रहता है, और इन फाइलों में यूनिकोड हिंदी में मजे से काम किया जा सकता है। यदि इस तरह के फाइलों को खोला रखकर इनडिजाइन की नई फाइलें बनाने पर यह इंटरफेस उन नए फाइलों में भी काम करता रहता है। यानी ट्रायल अवधि बीत जाने के बाद भी काम चलता रहता है। पर जो लोग इंडिजाइन में नियमित काम करते हों, उन्हें यह प्लग-इन खरीद लेना चाहिए।

इन प्लग-इनों के बारे में अधिक जानकारी के लिए और इनके उपयोग की रीति के बारे में और जानने के लिए, निम्नलिखित कड़ी को भी देख आएं –

http://www.thomasphinney.com/2009/01/adobe-world-ready-composer/

इंडिजाइन एमई

और अंत में इनडिजाइन की एक विशेष संस्करण के बारे में, जिसे इनडिजाइन मिडल ईस्टर्न (एमई) कहा जाता है। यह दाएं से बाएं लिखी जानेवाली अरबी आदि भाषाओं के लिए बनाया गया इनडिजाइन का विशेष संस्करण है। इस संस्करण का उपयोग करके यूनिकोड हिंदी में भी काम किया जा सकता है। पर मेरी जानकारी के अनुसार इसकी कीमत कुछ 2500 डालर है।

समाहार

इस तरह हम कह सकते हैं कि अब इंडिजाइन में यूनिकोड हिंदी का उपयोग करना संभव हो गया है –
1. यदि आप सीएस2 या सीएस3 का उपयोग करते हों, तो मेटाडिजाइन द्वारा विकसित इंडिक प्लग-इन का उपयोग करें।
2. यदि आप सीएस4 का उपयोग करते हों, तो वर्ल्ड रेडी कंपोसर का उपयोग करें।
3. या यदि आपकी जेब में खूब पैसे हों, तो इंडिजाइन एमई खरीदें।
4. या आप धीरजवाले व्यक्ति हों तो एडोब सीएस5 के आने का इंतजार करें, जिसके बारे में अफवाह है कि वह 2010 के अक्तूबर तक बाजार में आ जाएगा। इसमें यूनिकोड हिंदी के लिए पूर्ण समर्थन होने की लगभग शत-प्रतिशत संभावना है, कम-से-कम इंडिजाइन सीएस5 में तो हिंदी के लिए पूर्ण समर्थन होना चाहिए। पर फोटोशोप, इलस्ट्रेटर आदि के लिए संभवतः सीएस5 में समर्थन नहीं रहेगा, क्योंकि इनमें हिंदी समर्थन लाने के लिए एडोब को और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है। पर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है, सीएस5 में फोटोशोप, इलस्ट्रेटर, फ्लैश आदि सभी में हिंदी समर्थन लाकर एडोब हमें चकित भी कर सकता है।

6 Comments:

Raviratlami said...

इस समस्या का त्वरित हल तो कंपनियाँ ये कर सकती हैं कि ऑन-द-फ़्लाई यूनिकोड हिन्दी से पुराने हिन्दी फ़ॉन्ट में परिवर्तन का प्लगइन जैसा कुछ बना लें (क्योंकि हिन्दी जैसे कॉम्प्लेक्स स्क्रिप्ट को प्रोग्राम स्तर पर एनेबल करने में कई दिक्कतें आती हैं) जिससे काम बहुत जल्द और आसानी से हो सकता है. फिर भी उम्मीद करें कि आने वाले एक दो साल में ये समस्याएँ खत्म हो जाएं...

विनय ‘नज़र’ said...

एडोबी यह सब शीघ्र अति शीघ्र निपटा लेने वाली है.. \ अच्छा लेख है!
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ना लाओ ज़माने को तेरे-मेरे बीच

इरशाद अली said...

bahut accha artical hae sir ji. kya aap yah bata sakte hae ki design work kae liya hindi kae acchae font kaun sae hae.

बालसुब्रमण्यम said...

इरशाद जी: यदि यूनिकोड फोर्मैटिंग में डिजाइन करना हो, तो बहुत कम विकल्प हैं। सभी उपलब्ध फोंटों में कोई न कोई त्रुटि है। मैंने इन फोंटों की समीक्षा मेरे पिछले एक लेख में की है - नए मंगल फोंट की त्रुटियां, वाला पोस्ट देखें।

सबसे कम त्रुटियां सीडैक के CDAC-GIST Surekh में हैं।

यदि कोड-पेज वाले फोंटों का उपयोग करना हो, तो काफी विकल्प हैं, इतने सारे कि सबका उल्लेख यहां नहीं हो सकता, और मुझे सबका अनुभव भी नहीं है।

कृतिदेव सिरीज के फोंट छपाई में अच्छे दिखते हैं।

DV-TT Surekh (सीडैक का फोंट) भी ठीक है।

सीडैक ने बीसियों हिंदी फोंट जारी किए हैं। ये सब मेरे ख्याल से उनके वेब साइट से उपलब्ध हो सकते हैं। इनमें कई फोंट अच्छे हैं, और पाठ के मूड के अनुसार इनमें से कोई चुना जा सकता है, जैसे यदि पाठ का संबंध बच्चों से हो, तो श्वेता जैसे फोंट ठीक हो सकते हैं। जोर देना हो, तो मोटी लकीरोंवाले भीम जैसे फोंट ठीक हो सकते हैं। असल में इस विषय में सबकी पसंद अलग-अलग होती है। टेक्स्ट की विशेषता, टार्गेट ग्रूप, टेक्स्ट का पोसिशन (टाइटल में है, कैप्शन में हैं, इत्यादि) के अनुसार फोंट चुनना होगा।

अर्शिया अली said...

बहुत ही उपयोगी सूचना है। आभार।
( Treasurer-S. T. )

खुशदीप सहगल said...

ब्लॉग की दुनिया में नया दाखिला लिया है. अपने ब्लॉग deshnama.blogspot.com के ज़रिये आपका ब्लॉग हमसफ़र बनना चाहता हूँ, आपके comments के इंतजार में...

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